दो आंटियों की चूत से किराया माफ का सफर! 02
Hindi Sex Story : दो विधवा आंटियों ने गरीब किराएदार को चूत की भूख मिटाने के लिए, उसका rent माफ करके उससे - चूचियां चुसवाई फिर, चुत और गांड मरवाई उस जवान लंड से!
अभी तक आपने "दो आंटियों की चूत से किराया माफ का सफर!" में पढ़ा :-
“आआह्ह्ह… ओह्ह्ह… हाँ बेटा… ऐसे ही… मेरी चूत तुझे याद करेगी…” कंगना आंटी की आवाज़ काँप रही थी।
मीरा आंटी अब मेरे पास आईं। उन्होंने अपना निप्पल मेरे मुंह में दिया। मैं चूसता रहा। तीनों शरीर एक लय में हिल रहे थे।
लेकिन मैं जानबूझकर तेज नहीं कर रहा था। धीरे-धीरे चोद रहा था। ताकि मजा लंबा चले।
कंगना आंटी की चूत अब और गीली हो गई थी। हर धक्के पर “पच… पच…” की आवाज़ आ रही थी।
“मेरी बारी…” मीरा आंटी ने अधीर होकर कहा।
मैंने लंड बाहर निकाला। कंगना आंटी ने निराशा से कराहा। “निकाल मत… आह्ह…”
लेकिन मीरा आंटी पहले से ही घोड़ी बन चुकी थीं। उनकी पतली गांड ऊपर। चूत पीछे से चमक रही थी।
मैं उनके पीछे गया। लंड को उनके चूत पर रगड़ा।
“डाल… जल्दी…” मीरा आंटी ने कहा।
अब आगे :-
मीरा आंटी घोड़ी बनी हुई थीं। उनकी पतली कमर और फैली हुई गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड का सिर उनकी चूत के मुंहाने पर रखा और धीरे से रगड़ा। गीला, चिपचिपा।
“अंदर डाल ना बेटा… मत तड़पा…” मीरा आंटी की आवाज़ में अधीरता थी।
मैंने हल्का धक्का मारा। लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया। उनकी चूत कंगना आंटी से थोड़ी टाइट थी। अंदर की दीवारें लंड को दबा रही थीं।
“आआआह्ह्ह्ह…! ओह्ह्ह… बड़ा है… फट रही है मेरी चूत…” मीरा आंटी जोर से कराह उठीं। उनका पूरा शरीर काँप गया।
मैं रुका। पूरा नहीं डाला। बस धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। हर धक्के पर उनकी गांड लहराती। “पच… पच… पच…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
कंगना आंटी मेरे बगल में आकर बैठ गईं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। “मुझे भी… उँगलियाँ डालते रहो।”
मैं दो काम कर रहा था – एक हाथ से मीरा आंटी की कमर पकड़कर धीमी चुदाई, दूसरे हाथ से कंगना आंटी की चूत में दो उँगलियाँ अंदर-बाहर। दोनों औरतें एक साथ कराह रही थीं।
“हम्म्म… आह्ह्ह… गहरी… जोर से उँगली घुमाओ…” कंगना आंटी
“आआह्ह… तेज… लंड पूरा डाल… फाड़ दे…” मीरा आंटी
मैंने मीरा आंटी का लंड थोड़ा और अंदर डाला। अब पूरा 6 इंच अंदर था। उनकी चूत ने लंड को पूरी तरह निचोड़ लिया। मैं तेजी बढ़ाने लगा, लेकिन अभी भी controlled।
मीरा आंटी का सिर बिस्तर पर गिर गया। “उफ्फ्फ… मर गई… इतने साल बाद… जवान लंड… आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही चोद… मेरी रानी चूत को…”
कंगना आंटी ने मेरे नीचे लेटकर मेरा लंड और मीरा की चूत दोनों को देखा। फिर उन्होंने अपनी जीभ निकालकर मेरे लंड के नीचे वाले हिस्से को चाटना शुरू कर दिया, जहाँ लंड मीरा की चूत में जा रहा था।
“आआह्ह्ह… क्या कर रही हो आंटी…” मैं सिहर गया।
तीनों के शरीर पसीने से चिपक रहे थे। कमरा गर्म, भारी साँसों और चुदाई की आवाज़ों से भर गया था।
करीब 15 मिनट बाद मैंने पोजीशन बदला। अब मीरा आंटी ऊपर आ गईं। Cowgirl style। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत में बैठ गईं। धीरे-धीरे नीचे उतरीं।
“उम्म्म्म… भर गया… पूरा…” उनकी आँखें बंद, मुँह खुला। वे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी छोटी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने दोनों हाथों से पकड़कर मसलने लगा।
कंगना आंटी मेरे मुंह पर बैठ गईं। उनकी चूत मेरे चेहरे पर। “चाट… चूस… मेरा पानी पी ले…” ये Makan Malkin Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
मैं जीभ से उनकी चूत चाट रहा था। मीरा आंटी मेरे लंड पर उछल रही थीं। “आह्ह्ह… ओह्ह्ह… तेज… मेरी गांड हिल रही है… आआह्ह्ह!”
अचानक मीरा आंटी की गति तेज हुई। उनकी चूत सिकुड़ने लगी। “आ रहा… आ रहा है… आआआह्ह्ह्ह… झड़ रही हूँ…!”
वे जोर से काँपीं। गर्म पानी मेरे लंड पर बह निकला। मैंने चाटना जारी रखा। कंगना आंटी भी कराह रही थीं।
लेकिन मैंने अभी झड़ना नहीं था। लंड को रोका।
“अब मेरी बारी…” कंगना आंटी ने कहा। उन्होंने मीरा को हटाया और खुद घोड़ी बन गईं। उनकी मोटी गांड मेरे सामने। मैंने पीछे से लंड ठोका। एक ही झटके में पूरा अंदर चला गया।
“फट गई… आआह्ह्ह… मोटा लंड… मेरी चूत फाड़ दो राजा…” कंगना आंटी चिल्लाईं।
मैं अब थोड़ा तेज हो गया था। उनकी मोटी गांड हर धक्के पर टकरा रही थी। “थप… थप… थप…”
मीरा आंटी नीचे लेट गईं और कंगना आंटी की चूचियों को चूसने लगीं। दोनों औरतें एक-दूसरे को चूम रही थीं।
मैं 10 मिनट तक कंगना आंटी को चोदा। उनकी चूत अब बहुत ढीली और गीली हो चुकी थी। हर बार लंड बाहर निकालते ही “पचाक” की आवाज़ आती।
“सुसु… पीना है…” कंगना आंटी अचानक बोलीं।
वे उठीं। मेरे मुंह पर चूत रख दीं। “पी ले बेटा… तेरी किस्त…”
गर्म धार मेरे मुंह में गिरने लगी। नमकीन, गर्म। मैंने कुछ घूँट पिए। बाकी चेहरे पर बह गया। मीरा आंटी देख रही थीं। उनकी आँखों में वासना थी।
“मैं भी…” मीरा आंटी ने कहा। उन्होंने भी मेरे चेहरे पर चूत रखी और हल्की धार मारी। “पी… हम दोनों का अमृत…”
मेरा चेहरा, सीना सब गीला हो गया। लेकिन लंड और भी सख्त।
अब तीनों थोड़ा आराम करने लगे। पानी पिया। लेकिन हाथ एक-दूसरे पर थे। कंगना आंटी मेरे लंड को हल्के से हिला रही थीं। मीरा आंटी मेरी गांड में उँगली डाल रही थीं।
“अभी रात बाकी है…” कंगना आंटी मुस्कुराईं। “अब थ्रीसम में पूरा मज़ा लेंगे।” ये Hindi Sex Kahani आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।
वे दोनों मेरे ऊपर लेट गईं। कंगना ऊपर, मीरा नीचे। मैं बीच में। दोनों की चूतें मेरे लंड के पास। मैं एक-एक करके दोनों में डाल रहा था। कभी कंगना, कभी मीरा।
“आह्ह्ह… बदल-बदल के चोद… दोनों चूतें तेरी…”
कराहें बढ़ती जा रही थीं। “ओह्ह्ह… हाँ… गहरी… आआह्ह्ह… फाड़ दो… हम दोनों बूढ़ी चूतों को जवान कर दो…”
मेरा लंड अब थकने लगा था, लेकिन मजा इतना था कि रुक नहीं पा रहा था।
कंगना आंटी ने अचानक कहा, “अब झड़ने का समय आ गया है बेटा… लेकिन हम दोनों के मुंह में…”
दोनों औरतें नीचे सरक गईं। मेरे लंड को दोनों तरफ से चूसने लगीं। जीभें, होंठ, गला – सब इस्तेमाल हो रहा था।
“आआह्ह्ह… आंटी… निकल रहा है…” मैं कराहा।
दोनों आंटियाँ मेरे लंड को चूस रही थीं। कंगना आंटी गले तक ले जा रही थीं, मीरा आंटी अंडों को चूस रही थीं। कमरा सिर्फ चूसने की “चुप… चुप…” और कराहों से भरा हुआ था।
“आआह्ह्ह… आंटी… बहुत जोर से… निकलने वाला है…” मैं बेचैनी से कराहा। कमर हिल रही थी।
कंगना आंटी ने लंड मुँह से निकाला और मीरा आंटी को दिया। “तू पहले पी ले… मैं बाद में।”
मीरा आंटी ने पूरा लंड मुँह में ले लिया। गला फुल गया। उन्होंने जोर-जोर से सिर हिलाया। “ग्लक… ग्लक… ग्लक…”
मेरा लंड फड़क उठा। “आआआह्ह्ह… झड़ रहा हूँ… आंटी… पी लो सब…!”
गर्म-गर्म माल मीरा आंटी के गले में गिरा। उन्होंने कुछ निगल लिया, बाकी बाहर निकल आया। कंगना आंटी ने तुरंत लंड पकड़ा और बचा हुआ माल अपने मुँह में लिया।
दोनों आंटियाँ मेरे माल को बाँट रही थीं। जीभ से एक-दूसरे के होंठ चाट रही थीं।
“स्वादिष्ट… जवान माल…” कंगना आंटी ने कराहते हुए कहा।
मैं थककर लेट गया। लेकिन वे रुकी नहीं। दोनों मेरे सीने पर लेट गईं। उनकी चूचियाँ मेरे शरीर से दब रही थीं। मीरा आंटी ने मेरी गांड में उँगली घुमानी शुरू कर दी। “आराम मत कर… रात अभी लंबी है।”
करीब 10 मिनट बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। कंगना आंटी मुस्कुराईं। “देख मीरा… कितनी जवानी है।”
इस बार उन्होंने नया खेल शुरू किया। दोनों औरतें एक-दूसरे के सामने लेट गईं। टांगें आपस में मिलाईं। उनकी चूतें पास-पास। मैं बीच में घुस गया।
पहले मीरा आंटी की चूत में डाला। 10-15 धक्के दिए। फिर कंगना में। बारी-बारी। दोनों चूतों को एक साथ चोद रहा था।
“आह्ह्ह… ओह्ह्ह… बदल-बदल के… दोनों को फाड़…” “हाँ राजा… हमारी चूतें तेरी हो गईं… आआह्ह्ह… जोर से…!”
उनकी चूतों से पानी बह रहा था। बिस्तर गीला हो चुका था। मैं अब तेज हो गया था। थपाक-थपाक की आवाज़ तेज हो गई।
मीरा आंटी पहले झड़ीं। उनका शरीर अकड़ गया। “आआआह्ह्ह्ह… निकल रहा… मेरी चूत का पानी… आह्ह्ह!” गर्म फुहार मेरे पेट पर गिरी।
कंगना आंटी ने तुरंत मेरे लंड को अपनी चूत में लिया। “अब मुझे… तेज… फाड़ दे…” ये Antarvasna वाली Desi Sex, XXX Free Hindi Sex Story आप Garamkahani पर पढ़ रहे है।
मैं उनकी मोटी गांड पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा। उनकी भारी चूचियाँ उछल रही थीं। मीरा आंटी ने कंगना की चूची चूस ली और एक हाथ से मेरी गांड में दो उँगलियाँ डाल दीं।
“आआह्ह्ह… गांड भी… ओह्ह्ह… मैं मर जाऊँगी आज… आआह्ह्ह… चोद… चोद… चोद मेरी बूढ़ी चूत को…!” कंगना आंटी चिल्ला रही थीं।
उनकी चूत सिकुड़ी। दूसरी बार झड़ गईं। गर्म पानी मेरे लंड पर बहा। मैं भी दूसरी बार झड़ने वाला था।
“बाहर निकाल… हम दोनों के मुँह पर…” कंगना आंटी ने कहा।
मैंने लंड बाहर निकाला। दोनों आंटियाँ घुटनों के बल बैठ गईं। मुँह खोलकर जीभ बाहर। मैंने लंड हिलाया।
“आआह्ह्ह… ले लो… तीसरा माल… आआआह्ह्ह!”
मोटी धार दोनों के चेहरे, चूचियों और जीभ पर गिरने लगी। वे दोनों माल को चाट रही थीं, एक-दूसरे के चेहरे से साफ कर रही थीं।
“अम्म्म… गर्म… मीठा…” मीरा आंटी
तीनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। मैं बीच में। दोनों आंटियाँ मेरे सीने से चिपकी हुईं। पसीना, माल, सुसु - सब मिला हुआ। कमरा भारी महक से भर गया था,कंगना आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरा।
“अब तू हम दोनों का है। जब चाहें, बुलाएंगे।”
मीरा आंटी ने मेरे लंड को हल्के से सहलाया। “अगली बार और भी गंदा खेल खेलेंगे… गांड भी चोदवाएंगे।”
मैंने हाँ में सिर हिला दिया। अब मजा आ रहा था। शर्म कम, भूख ज्यादा।
उस रात तीन बार और चुदाई हुई। कभी किचन में खड़े-खड़े, कभी छत पर चाँदनी में। हर बार नया पोजीशन, नया मजा। सुबह होते-होते तीनों थककर सो गए।
कुछ महीने बाद…
मीरा आंटी अब अक्सर आने लगी थीं। कभी-कभी तो दोनों आंटियाँ मुझे घेर लेतीं। रेंट तो पहले ही माफ हो चुका था, अब तो सिर्फ चुदाई और प्यार बाकी था।
एक दिन कंगना आंटी ने कहा, “बेटा, जब तक तू दिल्ली में है, हम दोनों तेरी हैं। और तू हमारा।”
मैंने उन्हें गले लगा लिया। उम्र का फर्क, लेकिन देह की भूख और दिल का लगाव – सब सच्चा लगने लगा था।
अब जब भी दिल्ली आता हूँ, सीधे उसी पुराने घर में जाता हूँ। दरवाजा खुलते ही दो जोड़ी भूखी आँखें मुझे घूरती हैं।
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